तमिलनाडू

चुनावी हार के बाद AIADMK में अंदरूनी तनाव, पार्टी दो धड़ों में बंटी होने की चर्चा तेज

Kavita2
11 May 2026 9:29 AM IST
चुनावी हार के बाद AIADMK में अंदरूनी तनाव, पार्टी दो धड़ों में बंटी होने की चर्चा तेज
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु की प्रमुख विपक्षी पार्टी All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam में चुनावी हार के बाद अंदरूनी अस्थिरता बढ़ती नजर आ रही है। हाल ही में आए विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक फैसलों को लेकर मतभेद गहराते दिख रहे हैं, जिससे संगठन दो अलग-अलग धड़ों में बंटने की स्थिति में पहुंच गया है।

सूत्रों के अनुसार, पार्टी में यह भी चर्चा का विषय बन गया है कि विधायक दल के नेता के चयन में पार्टी नेतृत्व की पूरी सहमति नहीं ली गई। कहा जा रहा है कि पार्टी के महासचिव Edappadi K. Palaniswami की मंजूरी के बिना S. P. Velumani को AIADMK विधानमंडल दल का नेता चुना गया। इस निर्णय को लेकर पार्टी के अंदर असंतोष की स्थिति बनती दिख रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान को और अधिक स्पष्ट करता है। पहले से ही चुनावी नतीजों के बाद संगठन में बदलाव और आत्ममंथन की मांग उठ रही थी, लेकिन अब यह मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में National Democratic Alliance का नेतृत्व AIADMK ने किया था। पार्टी ने कुल 169 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन उसे केवल 47 सीटों पर ही जीत हासिल हुई। इस परिणाम के साथ पार्टी राज्य में तीसरे स्थान पर खिसक गई, जिससे संगठन की स्थिति कमजोर हुई।

चुनाव परिणामों के बाद से ही पार्टी के भीतर नेतृत्व की भूमिका और रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे थे। कई वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि चुनावी रणनीति और गठबंधन प्रबंधन में कमी के कारण यह परिणाम सामने आया। वहीं कुछ नेता संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता की कमी की बात भी कर रहे हैं।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह तनाव और बढ़ सकता है, क्योंकि कई नेता अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं। इससे संगठन में स्पष्ट विभाजन की स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि AIADMK के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि लगातार कमजोर प्रदर्शन के बाद पार्टी को एकजुट होकर नई रणनीति बनानी होगी। अगर अंदरूनी मतभेद समय रहते नहीं सुलझाए गए तो इसका असर आने वाले चुनावों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक तौर पर इन विवादों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।

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